भूपेश था तो भरोसा था
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| भूपेश बघेल |
सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ी अस्मिता, गरिमा, महिमा, खान–पान, भाषा, रीति–रिवाज, प्रत्येक पर्व, महापुरुषों को राजकीय स्तर पर प्रचलित करने हेतु साधुवाद। भारत देश जहां अधिकतर गौभक्त वास करते हों वहाँ एकलौता राज्य जिसमें गोबर भी बिकता था इससे अधिक कुछ कृषि हितैषी होना संभव नहीं, विभिन्न योजनाओं का ही असर था कि 2-3 लॉकडाउन में भी छत्तीसगढ़ ‘ऑटो सेक्टर’ जैसे ऊंचे उद्योग तक में वृद्धि कर रहा था वहीं आर्थिक प्रयासों के अलावा कर्मचारियों का वेतन तक नहीं कटा था जो कि कम से कम मेरी स्मृति में जीवंत है। आपकी उपलब्धियों में आरोप - प्रत्यारोप की राजनीतिक जवाबी के साथ - साथ आपका लगातार केन्द्रीय संस्थाओं व निरंकुश केंद्र के साथ संघर्ष भी रहा यह आपको वास्तव में राजनीतिक योद्धा साबित करता है यह अवसर अन्य राज्यों के भी मुख्यमंत्रियों को भी मिल सकता था पर मोर्चा खोलने का साहस करना आसान नहीं यह वह समय था जब काँग्रेस की पुकार उठना भी बंद हो चुकी थी (लगभग विलुप्त) उसी दौरान लगातार पदयात्रा करके जनमानस में गुहार लगाना यह अपने आप में ही गर्व समझने की बात है, देर सवेर आपकी कमी हर रूप में महसूस हो सकती है क्योंकि अक्सर विरोध के दौरान विकल्पों का ख्याल नहीं आता है।

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