Whatsapp Chat Leaked???
आज बात होने वाली है देश के एक देशभक्त एंकर के बारे में 'देशभक्त' सुनकर आप अपनी आँखों मे उत्पन्न होने वाली चमक को ज़रा दबा लीजिये क्योंकि यह तो कभी ड्रग्स मांगता है कभी TRP बात हो रही है Republic TV Channel के मालिक व एंकर अर्णब गोस्वामी जिनकी मुश्किलें कम होती नज़र नहीं आ रही हैं कुछ महीनों पहले एक एंटीरियर डिजाइनर की आत्महत्या के मसले में फंसे थे उसके बाद TRP Scandal में हालांकि 2024 तक तो इनका बाल भी बांका नहीं हो सकता क्योंकि इनके पास एक ताकतवर संरक्षक है वैसे अर्णब गोस्वामी अकेला नहीं है इस श्रेणी में और भी कई तथाकथित ऊँचे एंकर हैं अब आप भी उन्हें पत्रकार कहना बंद कर दें क्योंकि पत्रकार तो आज़ाद होते हैं गुलाम नहीं इन्हें देखकर तो ऐसा महसूस होता है कि यह सब सरकारी मीडिया हाउसेज हैं नेताओं के बयान अब ख़बर हो चुकी है विपक्ष से सवाल अब देश का शुभचिंतक होना हो चुका है ऐसे समय में देश के लिए बहुत आवश्यक है कि वह TV में न्यूज़ देखना छोड़ दें क्योंकि यह आपको सूचना रहित कर देंगे अगर सूचनाओं में ही विभिन्नता नहीं होगी तो आप आखिर कैसे जनता बच पाएंगे आपकी अंदर की नागरिकता नष्ट होने का मतलब है कि आपके पास वोटिंग के समय विकल्प नहीं बचेंगे विशाल जनमानस में आप यह बहाना भी सुन ही चुके होंगे कि "मोदी के अलावा किसको वोट दें" आप ऐसे जगहों पर राहुल गाँधी का विकल्प बिल्कुल पेश न करें अन्यथा वह आपके विकल्प के साथ आपकी भी खिल्ली उड़ाने में कमी नहीं करेंगे फ़िर ममता, अखिलेश, केजरीवाल तथा अन्य विपक्षी नेताओं पर तो वह हंस कर ही जवाब दे जाएगा पर तर्क नहीं क्योंकि नागरिक को अब इन्हीं के लिए तैयार कर दिया गया है स्वयं अर्णब गोस्वामी अपने प्रोग्राम के माध्यम से कई बार "Modi Vs Who?" का नारा लगा चुके हैं यह बहुत ही सूक्ष्म सर्जरी थी लेकिन इससे फ़ायदा तो वृहद था जिनको होना था हो ही रहा है वैसे... जब विपक्ष कमज़ोर हो जाये तब लोकतंत्र की चमक थोड़ी फीकी अवश्य पड़ जाती है क्योंकि तब सरकार से सवाल नहीं हो रहा होता लोकसभा, विधानसभा में लेकिन भारत एक विशाल लोकतांत्रिक देश है यहाँ सवाल होते भी हैं तो उनकी गूँज जनता तक नहीं आती इसमें भी अपने रोड़े है सबसे पहले तो गोदी मीडिया जो हर तरीके से जनता को ही कुचलती है पर गुदगुदाने के लिए हर शाम एक हिन्दू-मुस्लिम बहस का आयोजन कर कभी विपक्ष को गलियाती है तो कभी पाकिस्तान की धज्जियां स्टूडियो में ही उड़ाने लगती है तो कभी किसी अभिनेता के मृत्यु के बाद महीनों तक आत्महत्या को हत्या बताकर न्यायालय का भी काम आसान करती है जैसे अर्णब ने सुशांत को न्याय दिलाने के लिए पूरे लॉकडाउन तक टाइमपास किया अब वही अर्णब सुशांत की आत्मा को अकेला छोड़ न्याय के लिए भटकने हेतु छोड़ दिया, कभी किसी ने पुरानी फिल्मों के गीत चलाये कभी सोशल मीडिया से निकाली फ़ोटो के साथ भाव-भीनी श्रद्धाजंलि गम्भीर अध्ययन कराया गया काश इतना अध्ययन किसी महान हस्ती पर करते तो कम से कम एंकर को ही सीख मिलती।
गोदी मीडिया के विषय पर बोलते वक़्त मैं हमेशा ज़्यादा कह जाया करता हूँ शायद यह उनकी ही देन है ख़ैर छोड़िए आज हम जानने वाले हैं प्रसिद्ध तथाकथित व्हाट्सएप्प चैट लीक की जो कि REPUBLIC TV के एंकर व मालिक अर्णब गोस्वामी और भूतपूर्व BARC के CEO पार्थो दास गुप्ता के बीच की है बाकी न अर्णब के न ही पार्थो दास गुप्ता के अन्य निजी चैट्स का ज़िक्र इसमें मिलता है।
बल्कि यह चैट सिर्फ लीक नहीं हुई है 3,400 पेज की पूरी चार्जसीट लीक हो गयी है जो कि अर्णब गोस्वामी के TRP Scandal को एक्सपोज़ करने वाली थी इन 3,400 पेजों में से 500 पेज की तथाकथित चैट्स और ईमेल्स लीक हुई है कयास लगाए जा रही है कि इन चैट्स को पार्थो दास गुप्ता के फ़ोन से Export Chat feature के जरिये निकाला गया है पार्थो दासगुप्ता 24 दिसम्बर से मुम्बई पुलिस की कस्टडी में हैं इन चैट्स में जो मुख्य बिंदु है उन्हें हमें जानना आवश्यक है हम उनकी ही चर्चा करने की निष्पक्ष कोशिश करेंगे।
BARC - आगे चर्चा में इसका ज़िक्र आने वाला है पहले जान ले यह है क्या Broadcast Audience Research Council यह संस्था सभी TV Channels के TRP निकालने का काम करती है जिसके CEO थे पार्थो दासगुप्ता।
यह सारी चैट 2017 से 2020 तक की है जिसके अनुसार यह पता चला कि वह आपस काफ़ी बातचीत करते थे Morning Wishes भी चलती थी और मिलकर लंच आदि पर भी जाते थे साथ ही साथ अन्य पत्रकारों का मज़ाक उड़ाना राहुल गाँधी का मज़ाक बनाना और अन्य न्यूज़ चैंनलों के मालिकों को मूर्ख बताना भी शामिल है न्यूज़ चैंनलों के उपहास में मुख्य भूमिका में थे टाइम्स नाउ और रजत शर्मा जबकि अर्णब और पार्थो दासगुप्ता दोनों ही टाइम्स नाउ में साथ काम कर चुके हैं।
1. राजदीप सरदेसाई के बारे में अर्णब के कथन थे कि वह अपनी नौकरी खोने वाला है
2. अरुन पूरी काँग्रेस प्रोपगेंडा मशीन का एक हिस्सा है
3. रजत शर्मा मूर्ख है, राहुल वैष्णव के बारे में भी ऐसे ही वाक्य थे
4. मंत्रलाय और अधिकारी अर्णब गोस्वामी की मदद के लिए हमेशा तैयार थी
5. सूचना व प्रसारण मंत्रालय Republic TV संबंधी शिकायतों को दबाते भी था
6. गुप्ता कभी कभी अर्णब को शाम के प्रोग्राम के लिए स्टोरीज़ भी सुझाते थे
7. 11 सितम्बर 2017 के चैट्स में पता चलता है कि स्मृति ईरानी के साथ दिल्ली से मुंबई तक कि यात्रा के बाद अर्णब उन्हें एक "बेहतरीन दोस्त" भी बताया करते थे
8. अर्णब और गुप्ता TRP के बारे में भी खूब बाते किया करते थे
9. Republic TV मोदी सरकार को समर्थन देती थी और सरकार Republic TV को
10. 2017 में Republic TV लॉन्च हुआ था जबकि इसके लॉन्चिंग में ही कई आरोप लगे थे सरकार के 52 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था DD National के हेड चेयरमैन ने खत भी लिखकर सरकार को सूचित भी किया था (इसका विवरण जानने के लिए सन्दर्भ में उपस्थित लिंक से पढ़े)
11. और इन चैट्स के अनुसार इस शिकायत के लिए पार्थो ने भी आगाह किया था पर अर्णब ने बताया 'राठौर' उनकी मदद कर रहे हैं शिकायत को दरकिनार करने के लिए 'राठौर' अक्सर राज्यवर्धन राठौर को कहा करते थे वह तब सूचना व प्रसारण मंत्री भी थे
12. जुलाई 2019 में News18 के TRP में इज़ाफ़ा होने पर अर्णब के मैसेजस में ईर्ष्या की वह भावना दिखी जो कि अन्य चैनलों के साथ भी थी
13. "Kangna is rating earner" अर्णब ने यह मेसेज किया था जब Republic TV सुशांत सिंह के आत्महत्या के बाद कंगना का interview दिन में 3 बार चलाया पर वह रेटिंग नहीं मिली जो आज़तक चैनल मिली और अर्णब इस बात से परेशान भी थे
14. अर्णब के द्वारा पार्थो को यह बताए जाने पर कि अरुण जेटली काफ़ी बीमार हैं बिस्तर पर हैं पार्थो ने रिप्लाई किया था "वह अभी तक मरा नहीं" लेकिन अर्णब ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी बल्कि जेटली की मृत्यु के बाद दोनों रजत शर्मा का करियर ख़त्म होने की उम्मीद लगा रहे थे क्योंकि दोनों साथ पढ़ चुके थे इसलिए उनका अपने व्यक्तिगत संबंध रहे होंगे
15. बालाकोट एयर स्ट्राइक्स के बारे में अर्णब को पहले से जानकारी थी और वह इसे साझा भी कर रहे थे कोई और आम व्यक्ति अगर होता तो उसको 1929 में बने Top Military Secrets कानून के तहत कार्यवाही हो जाती वह यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि आख़िर यह इतनी गंभीर गुप्त जानकारी अर्णब को कैसे मिली यह पूरे उच्च सिस्टम पर सवाल है और असल मे देश की ऐसी गुप्त बातें साझा करना देशद्रोह है
16. अर्णब बातों में ही अजीत डोभाल से मिलते रहने की भी बात करते हैं
17. आर्टिकल-370 हटने के पहले ही अर्णब को जानकारी थी चैट्स में आप आसानी से देख सकते हैं कि कैसे अर्णब ने 3 अगस्त 2019 को ही कश्मीर अपने 50 क्रू मेंबर्स को रवाना कर दिया था
18. पार्थो गुप्ता ने 16 अक्टूबर 2019 में अर्णब से विनती भी की थी कि वह इस BARC से ऊब गए हैं इसलिए वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए PMO में मीडिया एडवाइजर जैसे किसी पद तक ले जाने में सहयोग करें 19. पार्थो ने TRP सम्बंधित किसी नए प्रणाली को अपनाने से रोकने के लिए अर्णब को कहा भी था, अर्णब ने कहा कि पार्थो कोई 3 बिंदु दे ताकि अर्णब 'AS' के सामने उन्हें साबित कर सके AS के बारे में सुनकर लगता अवश्य है कि यह कोई शक्तिशाली आदमी है
20. "All ministers with us" यह मैसेज अर्णब का है जो कि 17 मई 2017 में पार्थो दास गुप्ता को किया गया था
22. अर्णब के मैसेज सिर्फ़ सरकार या मंत्रालय पर ही सवाल नहीं उठाते बल्कि कई जगहों पर न्यायालय पर भी स्वतंत्रता व मुक्त होकर कार्य करने पर भी सवाल खड़ा करता है आख़िर एक एंकर का इतना प्रभाव कैसे हो सकता है यह सोचने पर भी मजबूर करता है "Buy the judge"
23. पुलवामा में शहीद सैनिकों के लिए जब पूरे देश में शोक की लहर तब इस अमानवीय एंकर को यह अपने लिए एक बड़ी जीत लग रही थी
24. पार्थो दासगुप्ता के अनुसार प्रकाश जावड़ेकर अनुपयोगी व्यक्ति हैं।
आखिरकार इन तथाकथित चैट्स के चलते ही पर अर्णब जैसे एंकर की कम से कम 'गिद्ध पत्रकारिता' का अस्तित्व तो समझ में आएगा लेकिन समझ नहीं आएगा भारत की जनता जो रोज़ाना ऐसे न्यूज़ चैनलों की दी खुराक लेती है उसे यह समझ नहीं आएगा क्योंकि वह इतना सोचना चाहता ही नहीं सिर्फ आँख-कान खोलकर ऐसे न्यूज़ चैनलों को देखता है दिमाग में कुछ जाता नहीं पर गले में सब फंस जाता है उसके बाद वह व्यक्ति सिर्फ बोलना शुरू कर देता है सुनता नहीं बिल्कुल अर्णब जैसे वैसे इन चैट्स का सत्यापन अभी हुआ नहीं है हो ही सकता है कि किसी ने बैठकर खुद ही 500 पेज की चैट्स टाइप की होगी क्योंकि किसी की तरफ़ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है पर इसके सच या झूठ होने पर भी कुछ बिंदुओं पर ज्ञान होना आपके लिए आवश्यक है ताकि आप तर्कहीन न बचें
सत्यता के पक्ष में -
1. चैट्स के तारीख़ और समय समकालीन घटनाओं के हिसाब से एकदम सत्य है मतलब चैट्स के समय व घटनाएं आपस में मिलती हुई नज़र आती है किसी दूसरे व्यक्ति का इतने पन्नो पर चैट्स बनाना आसान नहीं होता इसलिए यह एक बड़ा सबूत है।
2. अर्णब ने पार्थो दासगुप्ता को किसी कार्यक्रम में जाने के लिए एक भाषण लिख कर दिया था वैसा ही शब्दों की समानता के साथ भाषण दासगुप्ता ने दिया था यह यूट्यूब पर अभी भी उपलब्ध है।
फ़र्जी होने के पक्ष में -
1. सबसे बड़ी बात की सारी चैट्स सिर्फ़ स्माल लेटर्स में है कहीं पर कैपिटल लेटर्स का इस्तेमाल नहीं मिलता और वह व्यक्ति जो कि हर शाम टीवी पर आकर फ़र्जी देशप्रेम का डंका पीटता है इतना चीखता है वह कैसे स्माल लेटर्स का इस्तेमाल कर रहा है।
2. अर्णब ऑक्सफोर्ड से पढ़कर आया है पर चैट्स में काफ़ी सारे grammatical mistakes मिले यह सम्भव नहीं हो सकता कि एक अंग्रेजी एंकर grammar में mistakes करे।
अगर यह चैट्स किसी विकसित देश मे लीक हुई होती तो हफ्तों इसमें बहस चलती तरह-तरह के तर्क सामने आते पर हमारा मुख्य धारा का मीडिया कहीं न कहीं इसे दबाने में लगा है शुक्र है सोशल मीडिया है तो वायरल होते होते हम जैसों तक पहुँच गया मुख्य धारा के मीडिया के विभिन्न चैनल इसकी पोल खुलने से बच रहे हैं क्योंकि जब किसी परिवार पर संकट आती है तो परिवार एकजुट लड़ता है वैसे ही इस परिवार का मुखिया अर्णब है लेकिन अन्य सदस्य मुखिया को नहीं बल्कि किसी संरक्षक को बचा रहे हैं बल्कि मुखिया और सदस्यों में तो आपसी फूट नज़र आ रही है।
यह जो गोदी मीडिया है ना इतने गुप्त मिशन पर है कि इसका पता आमजन को नहीं चलेगा जबतक आप न्यूज़ चैनल देखना नहीं छोड़ देते अर्णब अब एंकर नहीं बल्कि एक समाज बन चुका है यह समाज भी उसके द्वारा ही तैयार किया गया है उसी की तरह चीखता है डराता है और सवाल और जवाब से डरता है लेकिन अर्णब पैदा ऐसे नहीं हुआ था उसके भी कई दमदार interview है जिसमें उसने योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं, प्रवक्ताओं की सवालों से घेर चुका है उसमें ऐसे बदलाव 2017 के बाद ही आये वैसे यह बदलाव नहीं असल मायनों में एक्टिंग है न्यूज़ चैनलों के स्टूडियो को भी फ़िल्मी स्टूडियो की तरह देखने की ज़रूरत है ये एंकर भी वातानुकूलित सेट में बैठकर एक्टिंग करते हैं इन्हें पता सब है लेकिन किसी लालच, डर की वजह से जनता के अन्तर्मन से लोकतंत्र का अस्तित्व मिटा दिया है इसका बहुत छोटा सा उदाहरण ही है 2010-12 तक याद कीजिए भ्रष्टाचार, महंगाई, पेट्रोल-डीजल जैसे शब्द चैनलों में निरंतर नज़र आते थे आलम यह था भाईसाहब कि एक तरफ 'शिवा जी-द बॉस' 'खट्टा-मीठा' जैसी भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली फिल्में बन रही थी तो दूसरी तरफ़ 'महँगाई डायन खाई जात है' जैसे गाने आ रहे थे, लेकिन अब 'भारत विश्वगुरु' 'मास्टरस्ट्रोक' '56 इंच' 'पाकिस्तान' और न जाने क्या-क्या शब्द ईजाद किये गए हैं अंतिम बार आपने कब किसी स्टिंग ऑपरेशन के बारे में सुना था याद कीजिए।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता ही है इसलिए लोकतंत्र को किसी एंकर के हाथों लंगड़ा मत करने दीजिए आप चीन का बॉयकॉट भले हर 6 महीनों में करें पर इनका बॉयकॉट आप हर रोज करें। यह ख़बर दबाई जा रही है इसलिए आप अपने स्तर पर लोगों को अवगत करायें आप जनता हैं आप ही ताकतवर हैं कुछ नहीं तो इस लेख को ही शेयर करें।
धन्यवाद
(ऊपर मैंने 24 बिंदु पेश करने की कोशिश की है पर बात और भी हैं इसलिए एक और लेख लिखूंगा, प्रमाण आदि के लिए आप सन्दर्भ पर नज़र डालें)
सन्दर्भ -
Bahut khoob likha gya h
ReplyDeleteAseem Dhanyawad
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