चाइना आख़िर कैसे आगे निकला ???
आज हम समझने की कोशिश करेंगे कि हमारा पड़ोसी देश चाइना मात्र 30 सालों के भीतर ही हमसे इतना आगे कैसे निकल गया उसे यह शक्ति किन स्त्रोतों से प्राप्त हुई या उसने ऐसी कौन सी नीतियाँ अपनाई जिसे हम न अपनाने के लिए करबद्ध रहे। चीन का विश्व भर में व्यापार में डंका बज रहा है पहली बार कोई देश अमेरिका को व्यापार में टक्कर देने की कूवत कर चुका है तथा अपने सामने सभी देशों को तिरछी नजरों से देख रहा है। हम चीन की न सिर्फ़ राजनीतिक नीतियाँ बल्कि कुछ व्यापारिक नीतियों की भी विवेचना करेंगे जिससे हमें चीन के व्यापारिक उन्नत्ति का राज भी समझ आ सके।
सन 1998 में जिस देश का ग्लोबल आउटपुट वैल्यू 3% पर था वह कैसे 2018 में 25% तक पहुंचा मतलब मात्र 25-30 सालों में आज चीन 2.64 ट्रिलियन डॉलर निर्यात करता है वहीं भारत 0.54 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात कर हिस्सेदारी निभाता है। अमेरिका के अपने देश 90% झंडे चीन में बन रहे हैं विश्व के 80% एसी, 74% सोलर पैनल, 70% मोबाईल फ़ोन, 60% जूते, 60% सीमेंट, 50% कोयला, 45% जहाज, 50% स्टील यह सब अकेला एक देश चीन बना रहा है लोगों को लगता है चीन सिर्फ़ सस्ते समान बनाता है ऐसा नहीं है जनाब जानकर आश्चर्य होगा पर आज दुनिया के 60% लक्ज़री आइटम्स भी चीन में बन रहे हैं।
जी हाँ यह वही देश है जो भारत से भी पिछड़ा हुआ था जिसकी प्रति व्यक्ति आय सन 1978 में 155 डॉलर थी और सन 1990 तक आते आते यह 317 डॉलर पर पहुँची वहीं भारत अबतक 367 डॉलर के आंकड़े पर था मतलब चीन से हमेशा से आगे पर आज चीन की प्रति व्यक्ति आय अर्थात पर कैपिटा इनकम 10,276 डॉलर है वहीं हम भारतीय 1,800 डॉलर के समीप हैं देखते देखते मात्र 25 सालों में चीन ने अपने 80 करोड़ लोगों को गरीबी से चंगुल से आज़ाद कराया, यह इतना आसान तो नहीं हो सकता इसीलिए आइए इतिहास से क्रमवत जानने की कोशिश करें कि ऐसी क्या नीतियाँ-निर्णय थे जिससे चीन असल में विश्वगुरु बनने लगा।
यह देखिए यह चीन और यह है भारत इतने बड़े हिस्से होने के बावजूद भारत से जमीन की भीख मानना या बालहठ करना किसी के भी समझ नहीं आता लेकिन वह दूसरी बहस है उसके लिए आप TV News चैनल देखें।
पुरातन काल में चीन काफ़ी सम्पन्न हुआ करता था पर 18-19वीं शताब्दी में पश्चिमी देशों और जापान के कब्ज़े में आया उनका गुलाम बनकर रहा पर 1912 में यह आज़ाद हुआ और यहाँ से भी मोनार्की प्रथा समाप्त हुई फ़िर राजनीतिक उथल-पुथल के स्वरूप 1927 से 1949 तक सिविल वॉर चालू हुआ सन 1949 में माओ जेदोंग सत्ता पर काबिज़ हुए माओ एक क्रांतिकारी जरूर थे पर उन्हें अर्थव्यवस्था चलानी नहीं आती थी तभी 1962 में जब भारत-चीन युद्ध चल रहा था तब चीन में लोग अकाल की वज़ह से दम तोड़ रहे थे हालात तो यहाँ तक आ गयी थी कि लोगों को मिट्टी, पौधें तक खाने की नौबत आ चुकी थी और वह खा भी रहे थे इस अकाल को हम कृषि विज्ञान के छात्र "आर्गेनिक डिजास्टर" के नाम से जानते हैं पर कभी-कभी की लोग इस अकाल की वज़ह पक्षियों की कमी भी बताते हैं। पर इस समय तक भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ढंग से चल रही थी नए नए संस्थान बन रहे थे अनुसंधान हो रहे थे योजनाएं बन रही थी प्रभावी हो रही थी हरित क्रांति के बाद से तो देश से अकाल भी विलुप्त हो गया श्वेत क्रांति से दूध की कमी में भी कमी आयी अतः कुल मिलाकर भारत बढ़ रहा था अर्थव्यवस्था बढ़ रही थी भले अब आपका दोस्त पूछे कि "70 सालों में हुआ क्या"
सन 1975 में माओ के देहांत के बाद दोंग ज़ियोपिंग आये उन्होंने ने वहाँ वैज्ञानिक संस्थान खोले, शिक्षा पर ज़ोर दिया कई प्रयास किये पर वह उतने सफल नहीं थे वहीं 1980 तक भारत में लाइसेंस राज चल रहा था जिसके पास भांति-भांति के लाइसेंस और कागज़ थे सिर्फ वही उत्पादन कर रहे थे, चीन समझ चुका था कि अगर किसी देश को आगे बढ़ना है तो अमेरिका से दुश्मनी रखकर यह सम्भव नहीं इसलिए बाद में अमेरिका से दोस्ती का हाथ बढ़ाया अमेरिका ने भी W.T.O (World Trading Organization) में चीन को शामिल किया।
सन 1993 में जियान ज़ेमीन आये इनाकी नीतियाँ काफी प्रभावी साबित हुई इनसे ही बदलाव की शुरुआत मानी गयी 1997 में हांगकांग भी आज़ाद हुआ परन्तु मुख्य बदलाव सन 2000 के बाद आया चीन ने आउटसोर्सिंग का सहारा लिया चीन के पास ज़मीन थी श्रमिक थे उसने सभी को प्रशिक्षित किया और जिनके पास पैसे थे उन्हें रिझाकर चीन में फ़ैक्टरी खोलने के लिए आकर्षित किया जिससे हुआ यह कि सभी फ़ैक्टरी चीन पहुंचने लगी और लोगों को रोज़गार मिला जिससे एक बड़ा गरीब वर्ग गरीबी के जंजाल से बाहर आ गया जो लागत अन्य देशों में आती वही लागत चीन में काफ़ी कम आने लगी, एक अच्छी निर्माता की तकनीक होती ही है कि लागत कम से कम आये जैसे अभी पिछले साल गाज़ियाबाद से मेरठ की रेल सुरंग का ठेका सरकार को चीनी कंपनी को देना पड़ा क्योंकि यह सबसे कम लागत 1,126 करोड़ में अच्छा काम कर के देने को तैयार है फ़िर पता नहीं सरकार ने चीनी एप्स में प्रतिबंध भी क्यों लगाया और 'बॉयकॉट चाइना' जैसे नारे जनता के दिमाग मे न्यूज चैंनलस से क्यों डाले जबकि चीन के एक मंत्री का बयान आ चुका था कि "भारत की खुद की क्षमता नहीं इसलिए वह बार-बार बॉयकॉट चाइना के नारे लगाता रहता है, भारत को अपनी उत्पादन क्षमता में विकास करना चाहिए" ऐसे बयान आने पर भी हमारे देश के नेता शांत थे चुप थे जबकि हमारे यहाँ तो मज़बूत, 56 इंच, शेर नेता आदि भी हैं शायद वह जानते थे कि चीन सही कह रहा है इसलिए अन्य प्रक्रिया न देकर विवाद नहीं बढ़ाया न हमारे न्यूज़ चैनलों ने दिखाया।
यह तो हो गये राजनीतिक कारण जिनसे चीन के उद्योग को रफ़्तार मिली अब अगर उन व्यापारिक रणनीतियों की की भी चर्चा न की गई तो जानकारी अधूरी ही मानी जायेगी आइए व्यसायिक कारणों को जानते हैं -
1. सामूहिक/समूह उत्पादन -
चीन का कोई भी उद्योग बहुत बड़ी मात्रा में उत्पादन करता है बहुत ही मैसिव इसीलिए उसकी लागत भी कम आती है जब किसी देश में ले जाकर अपना उत्पाद बेचता है तो उस देश के बाकी उद्योगों के उत्पाद अपेक्षाकृत महँगे होते हैं इसलिए वहीं के उद्योग ढप हो जाते हैं और पूरे बाज़ार में चाइना आइटम चारों ओर फैल जाता है आज से दस-पन्द्रह साल पहले याद कीजिये चाइना के रंग-बिरंगे, अधिक सुविधा वाले फ़ोन ने घर-घर तक फ़ोन को पहुँचाया था, और भारत में 1991 तक तो एन्टी लार्ज इंडस्ट्री पालिसी अपनायी जा रही थी अर्थात छोटे-छोटे स्तर पर उद्योग बनाये जा रहे थे हालांकि यह शुरुआत बहुत अच्छी थी लेकिन इसे स्केल अप करना नहीं बताया गया और चीन में स्केल अप पर ही गंभीर ध्यान दिया गया इसलिए वहाँ के उद्योग बढ़े।
विश्व भर में सबसे अधिक सेब चीन में उगाए जाते हैं फिर आता है अमेरिका का नाम आप दोनों देशों के उत्पादन का अंतर देख ही सकते हैं।
2.प्रतिस्पर्धी कीमत के साथ रिवर्स मैनुफैक्चरिंग -
चीन का नियम है कि किसी भी नए प्रोडक्ट के लॉन्च होने पर वह उसे अपने देश लाता है उसकी तकनीक देखता है समझता है और अपनाता है फिर हु-ब-हु वैसा ही डिवाइस बना कर बेचने लगता है तभी तो इनका अपना Facebook, YouTube, Whatsapp, Twitter है इससे फ़ायदा यह हुआ कि इनोवेशन, R & D, IPR (Intellectual Property Rights) का खर्च बच गया और लागत तो इनकी कम है ही इसलिए हर प्रोडक्ट की कीमत कम होने से यह ग्राहकों के लिए आकर्षक होता है उतने ही पैसों में वही फ़ीचर तभी तो Vivo & Oppo ने एक समय कब्ज़ा कर लिए था भारतीय बाज़ार में।
3. लागत प्रभावी श्रमिक -
लोगों को लगता है कि चीन की जनसंख्या की वज़ह से वहाँ के श्रमिक सस्ते हैं तो यह भ्रम है क्योंकि चीन के श्रमिक प्रोडक्टिव हैं' यह कथन एक विशेषज्ञ के हैं, वहाँ के श्रमिक इतने कार्य-कुशल हो चुके हैं इतना प्रशिक्षण दिया गया है एजुकेशन पर ध्यान दी गई गयी मैनेजमेंट लेवल की प्रैक्टिस कराई जाती है सरकार और उद्योग दोनों के द्वारा मिलकर इसलिए वहाँ श्रमिक इतने कार्य-कुशल हैं कि 1 घण्टे में अगर भारत के श्रमिक 10 फ़ोन बना सकते हैं तो वहाँ 100 फ़ोन तैयार हो सकते हैं, श्रमिकों की अधिकता से लागत कम होती है यह तकनीक चीन के उद्योगपतियों को अच्छे से पता है कम लागत में तैयार होने से ही कीमत भी कम हो जाती है। भारत में अच्छे श्रमिक हैं पर वह भी अवसरों की कमी में शहर बदलते रहते है मिलते नहीं हैं।
4. अनुभव और विशेषयज्ञता -
करत करत अभ्यास के जणमति होत सुजान.. यही हुआ है चीन में लोग वर्षों से इन्ही कार्यों में सलंग्न हैं इसलिए वह एक्सपर्ट हो गए कुछ भी पकड़ा दीजिये इन्हें तुरन्त तैयार कर लेंगे जटिल से जटिल भी, कुशलता का अभ्यास होने से ही यह कला इनके खून में जा बसी है। वैसे हमारे यहाँ भी कौशल विकास योजना शुरू की जा चुकी है पर इसमें अभी बहुत काम करना बाकी है।
5. स्थिरता -
विदेशों के उद्योगों को मालूम है कि चीन में स्थिरता है यहाँ सरकार से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर भी स्थिर है, पावर कट्स नहीं हैं, निस्तारण समस्याएं नहीं है न ही बाढ़ जनक क्षेत्र हैं इसलिए चीन की यह विशेषता विश्व भर की कंपनी को रिझाती हैं क्योंकि यह सब आसानी से उपलब्ध है वहीं भारत में फ़ैक्टरी खोलने के लिए लाइसेंस और कागजों में अपेक्षाकृत भयंकर मुश्किल है यहाँ कोई उद्योग खोलने के लिए समय, ऊर्जा और पैसे ज़्यादा खर्च करने पड़ते हैं। चाइना हमसे बेहतर ग्लोबल पार्टनर नज़र आता है तभी तो यही कारण है कि हमको ज़बरन Make In India करना पड़ रहा है क्योंकि हमारे तो कोई आ नहीं रहा।
6. शिक्षा -
शिक्षा के बगैर कुछ सम्भव नहीं है आप कितना ही कुशल बना ले शिक्षित कर्मचारियों की ज़रूरत आपको पड़ेगी ही आज भी दोनों देशों के स्नातकों की संख्या में भारी अंतर है हमारे यहाँ बजट में ही शिक्षा पर बहुत कम खर्च किया जा रहा है भारत सरकार तो अपनी नई शिक्षा के नीति में कहती है कि NACC यानि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की रेटिंग में 68% यूनिवर्सिटी औसत या औसत से भी ख़राब है 91% कॉलेज औसत या औसत से भी नीचे हैं अब सोचिये कितने दशकों से इनमें पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की न जाने कितनी पीढियां बर्बाद की गई होंगी। न जानने वाले कम समझने वाले छात्रों को तैयार किया गया वो भी लाखों की फीस लेकर।
7. इंडस्ट्रियल नेटवर्किंग क्लस्टरिंग -
कुछ उदाहरण लेते हैं जैसे डेट्रॉइट है मोटर हब, न्यूयॉर्क को फाइनेंस हब और सिलिकॉन वैली टेक्नोलॉजी हब कहा जाता है क्योंकि यहाँ की सरकार ने इन जगहों पर उस स्पेसिफिक प्रोडक्ट के लिए वहाँ आस-पास सारी सुविधाएं एक ही शहर में इकट्ठा करा दी गयी हैं इससे उद्योग खुलने के साथ ही निर्माण भी बड़ा आसान हो जाता है यह अन्य स्थानों की अपेक्षा में अधिक सुविधाजनक होता है ऐसा ही मॉडल चीन ने किया है जब उद्योग लगते हैं तब हजारों लोगों को रोज़गार मिलने लगता है और देखते ही देखते शहर से गरीबी छू मन्तर होने लगती है यह पूरे देश के लिए फायदेमंद साबित होता है, इन उद्योगों के लिए ट्रेनिंग, फाइनेंसिंग, अरेंजमेंट, एनकरेज आदि मदद सरकार को थोड़ी बहुत करनी ही होती है, पर ऐसी नीतियां हमारे यहाँ कहाँ बनती हैं पता नहीं क्या करते हैं आपके चुने हुए सांसद-विधायक-मंत्री।
8. विधुत -
देखिए बड़ी सामान्य सी बात है बिना बिजली के कोई भी उद्योग सफल नहीं है अर्थात उद्योग वहीं लगेंगे जहाँ बिजली हमेशा उपलब्ध होगी एक तो भारत में बिजली हर जगह हमेशा उपलब्ध भी नहीं है और महँगी भी है भारत में उद्योगों के लिए बिजली की क़ीमत 9 रु. किलोवॉट पड़ती है जबकि चीन में यह 3 रु. किलोवॉट है, आज भी बहुत से उद्योग अपने निजी तौर पर बिजली की व्यवस्था कर अपने उद्योग चला रहे हैं क्योंकि न जाने कब यह गायब हो जाये।
9. इंफ्रास्ट्रक्चर -
चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर के चर्चे तो पूरी दुनिया में हैं खैर चाहे वह रोड हो एयरपोर्ट हो पोर्ट हो या रेल लाइन्स हो वहाँ काफी आसान है भारत की अपेक्षा चीन में ट्रांसपोर्ट भी सस्ता है इस पर उन्होंने बहुत काम किया है, वहाँ सरकार अगले 25 सालों को लेकर विज़न बनाती है योजनाएं बनाती है यहाँ 5 साल बाद सरकार फिर कैसे आये इसलिए योजनाएं बनाते हैं, एक अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर होने से ग्रोथ, डेवेलपमेंट और नीड तीनों पूरे होने लगते हैं अंततः व्यापार आसान हो जाता है आप एक व्यापारी या किसान से भी जान सकते हैं कि ट्रांसपोर्ट कितना भार पैदा करता है उनके धंधे में।
10. सरकार और उद्योगपतियों की पार्टनरशिप -
चीन की सरकार अपने साथ कॉरपोरेट्स को साथ लेकर चलती है जैसे उन्होंने श्रीलंका में एयरपोर्ट, रोड, पोर्ट सब बना रहे हैं धीरे-धीरे श्रीलंका पूरा चीन के कब्ज़े में आने वाला है सिर्फ श्रीलंका नहीं बल्कि पाकिस्तान और अफ्रीका में भी चीन उतर चुका है सारे काम कर रहा है यह चीन की चाल तो है ही पर हम अभी सरकार और इंडस्ट्री की सांठ-गांठ देख रहे हैं हालांकि भारत में यह आसान नहीं है जैसे ही कोई सरकार किसी उद्योगपति के साथ मिलती है दूसरी तरफ़ से विपक्ष आरोप लगाना चालू कर देता है फिर चाहे वह "अंबानी-अडानी" हो या "रॉबर्ट वाड्रा" हर सरकार बनाम विपक्ष की कहानी है यह तो।
अब शायद आपको समझने में आसानी होगी कि चीन हमसे आगे कैसे निकल गया वो भी मात्र 25-30 सालों में यह समझना ही बस नहीं है हम भी अगर आने वाले 30 सालों की तैयारी करें तो हम भी 2nd लार्जेस्ट इकोनॉमी बनकर उभरेंगे, भारतीय पूरे विश्व भर में सबसे ज़्यादा होनहार हैं देखिए विदेशों में न जाने कितने भारतीय इंजीनियर मिलेंगे और चीन तो फिर भी बढ़ा हो रहा है किंतु हम तो जवान मुल्क हैं 54% जनसंख्या 29 साल के नीचे है तो क्या हम कुछ नहीं कर सकते.. कर सकते हैं बस आने वाले समय को सोंचकर अभी वर्तमान में उन्नति का प्रयास करना है हम युवाओं को यह सोशल मीडिया में साम्प्रदायिकता का त्याग कर टकराने को छोड़कर मिलकर कुछ करना होगा मैं कोई मोटिवेशनल स्पीकर तो नहीं हूँ पर यह ब्लॉग लिखते वक्त ही समझ आ गया क्योंकि मेरी और आपकी चुनी हुई हर सरकार इन दस बिंदुओं पर तो निकम्मी साबित हो रही है।
विश्व के कई विशेषज्ञ कह चुके हैं कि मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ाने से ही किसी भी देश की अर्थव्यवस्था सुधरेगी देश बढ़ेगा रोज़गार बढ़ेगा सरकार को मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में गति देने की अत्यंत आवश्यकता है क्योंकि 'Manufacturing is the key' यह कथन ही विशेषज्ञों का है कृषि सेक्टर हमारे यहाँ अच्छा करता है पर फिर भी जनसंख्या का 50% हिस्सा कृषि में लगे होने के बावजूद जीडीपी में मात्र 17-18% योगदान काफ़ी नहीं इसमें भी सुधार की आवश्यकता है वैसे भारत का सर्विस सेक्टर काफ़ी अच्छा कर रहा है TCS & Infosys जैसे कंपनियों ने बीते दशक में काफी अच्छा किया है बल्कि भारत अब एक सॉफ्टवेयर हब होने वाला है।
Manufacturing is the Key of economy, Agriculture is the Bone of economy and Service Sector is the Blood of an economy.
धन्यवाद
सन्दर्भ -
बहुत प्रभावी तरीके से लिखा gya
ReplyDeleteऔर मैं इस comment से प्रभावित हुआ
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