हमारे पूर्वज - आर्य
अगर कभी भारत के इतिहास की चर्चा हो तो हड़प्पा,मोहनजोदड़ो के बिन यह चर्चा कभी ख़त्म नहीं हो सकती और हो भी क्यों नहीं आख़िर यह विश्व की वही सबसे पुरानी सभ्यता है जिसने मानव को आधुनिकता से जोड़ दिया तथा सभ्य होने के सबूत पेश किये निकास, सिंचाई, पूजास्थल, स्नानागार, गलियां वैसे आपने इसे बचपन में इतिहास की किताबों में पढ़ा-सुना ही होगा लेक़िन हाल की ही ख़ुदाई से जो परिणाम आये हैं उससे भारत के राजनीतिक-सामाजिक ढांचे में उथल-पुथल आ सकती है यह आपको शायद ही किसी हिंदी अखबार या न्यूज चैनल में देखने मिले। पर बात होनी वाली है इतिहास की तो आपका क्रमबद्ध जानना आवश्यक है।
हड़प्पा - सर्वप्रथम सन 1856 में John William Brentano ने करांची से लाहौर तक रेल लाइन बिछाने के लिए खुदाई करवाई तब यह अचंभित करने वाली सबसे पुरानी सभ्यता विश्व की नजरों में आई उसके बाद इस जगह को सरंक्षित कर दिया गया, सन 1921 तक चली खुदाई को अंजाम दिया राय बहादुर सहानी ने उस समय के पुरातात्विक चीफ सर जॉन मार्शल के मार्गदर्शन में अतः खुदाई में यह पता चला कि यह सभ्यता सिंधु और घ्घर/हकड (सरस्वती का पुराना नाम) के तटों पर बसी थी पर करीब 2000 ई.पु में यह सभ्यता रहस्यमयी ढंग से नष्ट हो गयी इसके ख़त्म होने के कारण अभी तक साबित नहीं हुए हैं और Radio Carbon c14 technique से शोध में यह पता चला है कि यह सभ्यता लगभग 2350 ई.पु से 1750 ई.पु तक क़ायम थी और हड़प्पा सभ्यता को ही सैंधवकालीन सभ्यता भी कहते हैं और इस सैंधवकालीन के मुख्य 6 शहर थे - मोहनजोदाड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलवीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा।
आइए अब जानते हैं हमारी चर्चा का मुख्य विषय - राखीगढ़ी
राखीगढ़ी -
यह जगह सन 1963 में अपने अस्त्तित्व में आई और सन 1998-2001 तक यहाँ खुदाई चली बल्कि 2014 तक यह भी कहा जाना लगा कि राखीगढ़ी तो हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो से भी बड़ा शहर या सभ्यता थी। अभी यह जगह हरियाणा के हिसार में है नाम है टीला 07 वहाँ पर खुदाई से 4500 साल पुराने एक नहीं बल्कि कई कंकाल मिले हैं जिनकी DNA Profile तैयार की गई और परिणाम यह मिले की उनके DNA आर्यों के मुक़ाबले द्रविड़ों से ज़्यादा मेल खाते हैं।
जो आर्य और द्रविड़ की बहस को दूर से देखते हैं उन्हें बताना चाहूंगा कि आर्य वह थे जो पोलैंड से मिडल ईस्ट तक की स्टेपी (घास के बड़े मैदान) में रहते थे और ये वहीं से पहली बार भारत में आये थे और आज भी हम उत्तर भारतीयों के DNA आर्यों के DNA से 17.5% तक मेल खाते हैं और द्रविड़ प्रजाति दक्षिण भारत के जनजातियों के नजदीक समझ आते हैं ।
(शोधकर्ता - वसन्त शिंदे और दल)
खुदाई और शोध से निकलकर यह मुख्य बातें हमारे सामने आती हैं -
1. हिन्दू धर्म की स्थापना करने वाले लोग सैंधवकालीन सभ्यता के लोगों से अलग थे।
2. हड़प्पा सभ्यता के लोग संस्कृत व हिन्दू संस्कृति के स्रोत नहीं हैं।
3. इंडो आर्य नाम की प्रजाति लगभग 4000 वर्ष पहले मतलब 2000 ई.पु में पहली बार भारत आई।
4. हमारे वेद का लेखन स्टेपी के जमीनों से आये लोगों ने किया मतलब वेद 1500 ई.पु के बाद लिखे गए हैं।
5. मिले कंकालों के एक Genetic Marker यानि DNA में R1a1 gene नहीं मिला है यह वही gene है जो आर्यों में उपस्थित होता है हम भारतीयों में मुख्यतः उत्तर भारतीयों के पुरुष नस्लों में भी।
6. सैंधव काल में द्रविड़ों और भू-मध्यसागरीय लोगों का निवास था।
हालांकि द्रविड़ आरोप लगाते रहे हैं कि आर्य सैंधवकालीन सभ्यता पर आक्र्मण किया और वहाँ से द्रविडों को वहाँ से खदेड़ कर विंध्य (म.प्र) के इस पार भेज दिया और स्वयं राज स्थापित किया। कुछ विशेषज्ञों का यह कहना है कि आर्य पहली बार भारत आये और इनका सामना सबसे पहले हड़प्पा सभ्यता के लोगों से ही हुआ और सिंधु नदी के तट पर बसे होने की वजह से ही इसे सिंधुस्तान कहा गया फिर हिंदुस्तान उसका ही अपभ्रंश रूप है और Woods Hole Oceanographic Institute Massachusetts का मानना है कि सभ्यता नष्ट होने के कारण जलवायु परिवर्तन रहा होगा। अगर वेद 1500 ई.पु के बाद के हैं मतलब रामायण और महाभारत काल भी 1500 ई.पु के बाद ही हुए क्योंकि वेद तो रामायण काल से भी पुराने हैं हालांकि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि विज्ञान भी अभी पर्याप्त नहीं जानता बस हमारे जीते जी इस सभ्यता की चित्रात्मक लिपि पूरी समझ ली जाए।
दयानंद सरस्वती जो कि आर्य समाज के संस्थापक थे उनका मानना था कि आर्य इस सृष्टि के आरंभ से ही थे और,
तिलक का मानना था कि आर्य आर्कटिक (उत्तरी ध्रुव) से 10,000 साल पहले आये थे,
RSS के गोलवलकर का मानना भी यही था लेकिन वह कहते थे कि तब उत्तरी ध्रुव भारत का ही एक हिस्सा था।
लेकिन हम जानते हैं यह ऐसे लोग थे जो समाजसेवी थे या इनकी अपनी एक राजनीति थी आइए और जानें कि शोध क्या कहती है।
अक़्शेयता सूर्यनारायण जो कि Cambridge University में Ph.d की छात्रा थी उनके द्वारा Journal Of Archaeological Science में छपे लेख के अनुसार उनके शोध में उन्होंने हड़प्पा सभ्यता के भोजन पर शोध की तकनीक की मेहरबानी से उन्हें बर्तनों में से भेड़, बकरी, सुअर, गाय-बैल के माँस के अवशेष मिले और उनका मुख्य भोजन हिरन, बारहसिंगा, चीतल, जलीय जंतु और पक्षी भी पाए गए हैं लेकिन मुर्गों के सेवन के साक्ष्य अभी तक तो नहीं मिले हैं हालांकि भोजन पर पहले भी शोध की गयी थी जिसमें सैंधवकालीन सभ्यता के लोगों द्वारा गेहूँ, जौ, सरसों, तिल, बाजरा की खेती के साक्ष्य भी मिले हैं लेकिन पहली खेती कपास की बताई जाती है और तबतक धान या चावल का जिक्र नहीं मिलता।
ख़ैर जाने दीजिए 70 सालों से वर्तमान बदले या न बदले पर 70 सालों बाद इतिहास जरूर बदल रहा है निर्भय को डरपोक और कायरों को वीर बताया जाने लगा है, ऐसे ही कुछ मुसलमानों को लगने लगा कि गोया मुग़ल के समय सभी मुसलमान सोने से लदे थे इतिहास को अब सुविधानुसार महान या अत्यचारी बताया जा सकता है और स्वर्णिम, गौरवशाली जैसे वज़नी शब्दों से नवाजा जा सकता है पर सच सही और ग़लत के बीच में ही कहीं होता है राजा को राज मिलता है प्रजा का हाल बदस्तूर जारी ही रहता है।
धन्यवाद
संदर्भ - India Today Cover Story
ई.पु का मतलब जो कैलेंडर हम उपयोग करते हैं उस कैलेंडर की पहली तारीख से उतने ही साल पहले
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