बेकसूर मुर्गा - कभी Bird Flu कभी Corona

   यह लेख मेरे पसंदीदा जीव मुर्गे को समर्पित
                                इस चित्र में जो ऊपर मुर्गा दिख रहा है वह देखने में ही शक्ल से भी कितना भोला लग रहा है बेचारा अभी अनजान है कि उसके बारे में पूरे भारत में क्या क्या-क्या बातें होते रहती है कभी कोई इनको अपवित्र बताता है तो कभी कोई कोरोना वायरस का स्रोत तो कभी बर्ड फ्लू संक्रमण की वज़ह। 
                               पता नहीं whatsapp university को इन बेचारे पोल्ट्री वाले मुर्गे,अंडों से तकलीफ़ क्या है कभी भी कोई भी फ़ोटो, वीडियो उठाकर तेज़ी से फ़ैलाता है और इस university के मेहनती और लगन वाले छात्र इसे मानते हैं और वह इस ज्ञान को बांटते भी है क्योंकि ज्ञान बांटने से ही बढ़ता है, हाँ यह अलग बात है कि forward करने से ज्ञान घटने लगा है वैसे whatsapp university को सिर्फ़ इतिहास, काँग्रेस, ममता या मायावती और मुर्गों से ही परेशानी नहीं है बल्कि 2018 में भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी दो महिलाओं की फ़ोटो ट्वीट कर यह बताया था कि मोटी महिला मांसाहारी है जबकि शाकाहारी महिला पतली और स्वस्थ दिख रही है फिर शायद मंत्रालय की अक्ल ठिकाने आयी होगी और ट्वीट डिलीट किया गया।

आज हम समझने वाले हैं बर्ड फ़्लू को - 
सितम्बर 2016 में भारत को बर्ड फ़्लू मुक्त घोषित कर दिया गया था पर पिछले कुछ दिनों से हिमांचल में 2,000 प्रवासी पक्षियों की मौत हुई केरल में में 12,000 बतखों की मौत के बाद तो स्टेट डिज़ास्टर की घोषणा कर दी गयी अबतक हिमांचल, केरल, मध्यप्रदेश, राजस्थान राज्यों ने बर्ड फ़्लू संक्रमण की पुष्टि कर दी है गुजरात में भी संक्रमण हो चुका है हरयाणा के एक जिले में 4 लाख मुर्गों के मृत होने की खबर भी आ चुकी है इसके साथ ही केरल से मैसूर तक के पोल्ट्री के व्यापार में रोक लग चुकी है हिमांचल के काँगड़ा जिले के पोंगड़ाम अभ्यारण के 1 कि.मी के क्षेत्र में भी पोल्ट्री दुकानों पर पाबंदी के बाद मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में भी 15 दिनों के लिए चिकन व्यवसाय पर रोक लग चुकी है।

बर्ड फ़्लू बीमारी का नाम है जो कि पक्षियों पर प्रमुखता से तेज़ी से फैलती है यह Avian Influenza Virus द्वारा तेज़ी से संक्रमित होती है क्योंकि यह Influenza A टाइप का वायरस है इसके मुख्यतः 2 स्ट्रेन पाए गए हैं - H5N1 और H7N9. इससे संक्रमित पक्षी की 5 घंटों के भीतर ही मृत्यु हो जाती है और विशषज्ञों के अनुसार इसका मनुष्यों में फैलना दुलर्भ ही होता है यह पक्षियों में ही आसानी से फ़ैलता है मानवों में इसका ख़तरा बहुत कम यानी न के बराबर होता है और मनुष्यों से मनुष्यों में यह यौन क्रियाओं या शारीरिक सम्पर्क से ही फ़ैलता है।
अगर फ़िर भी मनुष्यों में फैल जाए तो इसके यह लक्षण होते हैं -
खांसी-ज़ुकाम, बुखार, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, सांस में तकलीफ़ और इसकी वज़ह से निमोनिया।
मनुष्यों के लिए इसकी जाँच PCR Test (Polymerase Chain Reaction) के द्वारा Nucleic acid की जाँच से होती है या तो एंटीबॉडी द्वारा इसके ईलाज के लिए एन्टी-वायरल दवाई Osiltamevier उपयोग किया जाता है। 

क्या चिकन-अंडा खाने से आप संक्रमित हो सकते हैं?
तो इसका जवाब है नहीं अगर मुर्गे या अन्य पक्षी व अंडे को अच्छे से पकाया जाए तो यह वायरस नष्ट हो जाता है और आप संक्रमित नहीं हो सकते इस वायरस के लिए 70℃ का तामपान भी काफ़ी होता है और पानी भी 100℃ पर उबलता है फ़िर माँस पकाते वक़्त कितने तामपान की कितनी देर आवश्यकता होती है आप जानते ही होंगे अगर माँस या अंडा कच्चा है यानी अधपका है तो संक्रमित होने का खतरा बन सकता है पर जैसा कि आप जानते हैं यह मुश्किल है। इसलिए आप मदन दिलावर जो कि राजस्थान से भाजपा विधायक हैं उनके बयान - "किसान चिकन बिरयानी खाकर बर्ड फ़्लू फैला रहे हैं" का तनिक भी भरोसा न करें क्योंकि इन्होंने आंदोलन को पिकनिक और किसानों को आतंकी, चोर भी बताया है।

राज्य की सीमाओं में हाल
मध्यप्रदेश से लगे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले (सोनांचल) और बिलासपुर से करीब 150 सैंपल NIHSAD भोपाल (National Institute of High Security Animal Disease) भेजे जा चुके हैं बस रिपोर्ट की इंतजार है आपको जानना चाहिए कि अभी छत्तीसगढ़ में बर्ड फ़्लू का एक भी संक्रमण नहीं मिला है आपने जो कौआ, कबूतर पक्षी मरे देखे तो वह विटामिन सी की कमी से ख़त्म हुए थे पर फ़िर भी प्रवासी पक्षियों के आने से संक्रमण की दशा बदल सकती है बिलासपुर में खोपरा, घोंघा, खूंटाघाट जलाशय व NTPC सीपत के पीछे के तालाब और मोहन-भट्टा और चाम्पी जलाशयों में प्रवासी पक्षी आते हैं इसलिए छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में इसके रोकथाम संबंधी निर्देश दे दिए गए हैं।
(छत्तीसगढ़ पशुपालन विभाग के डायरेक्टर श्री माथेस्वरन के अनुसार)
                          लोग इन तथ्यों को सुने बिना ही whatsapp मैसेज और सालों से चली आ रही दलील देने लगते हैं शायद वह इस भ्रांति की भावना से जुड़ चुके हैं कि मांसाहार ही गलत है बाकी हिंसा, ईर्ष्या, झूठ सब जायज़ है। कोरोना संक्रमण के समय मे भी इसी बेकसूर अनजान मुर्गे को बदनाम किया गया अगर वह भी शिक्षित होता तो ऐसे लोगों पर मानहानि का केस जरूर ठोकता अगर इंसान होता तो आत्महत्या कर लेता, इस बदनामी से ही भारत में पोल्ट्री व्यवसाय में सलंग्न 50 लाख से ज़्यादा रोज़गार ख़तरे में आ गए थे नुकसान तो बहुत हुआ पर फ़िर उसी मुर्गे पर बर्ड फ़्लू के दौरान अब फिर कुतर्कों का आक्रमण हुआ है मगर इस बार आप इन कुतर्कों को त्यागें 
 तर्कों के साथ इस लेख को शेयर करें ताकि पोल्ट्री व्यवसाय के साथ मेरा भी फ़ायदा हो जाये बीमारी कोई भी फैले पहले यह मुर्गे ही बदनाम होते हैं इंसान बाद में। आपको किसी दूसरे का भोजन निर्धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह जेल में होता है।

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